मोबाइल

ये मोबाइल यूँ ही हट्टा कट्टा नहीं 

                      

 बहुत कुछ खाया – पीया है इसने  

                 मसलन  

       ये हाथ की घड़ी खा गया  

        ये टॉर्च – लाईटे खा गया  

        ये चिट्ठी पत्रियाँ खा गया  

        ये    किताब    खा  गया

        ये     रेडियो    खा  गया

        ये टेप रिकॉर्डर  खा गया

          ये कैमरा     खा    गया

          ये कैल्क्युलेटर खा गया

       ये परोस की दोस्ती खा गया  

        ये मेल  – मिलाप खा गया 

          ये हमारा वक्त खा गया  

         ये हमारा सुकून खा गया  

               ये पैसे खा गया

              ये रिश्ते खा गया

            ये यादास्त खा गया

           ये तंदुरूस्ती खा गया

                 कमबख्त 

  इतना कुछ खाकर ही स्मार्ट बना

   बदलती दुनिया का ऐसा असर        

                 होने लगा

   आदमी पागल और फोन स्मार्ट 

                होने लगा 

   जब तक फोन वायर से बंधा था

          इंसान आजाद था

   जब से फोन आजाद हुआ है

     इंसान फोन से बंध गया है

    ऊँगलिया ही निभा रही रिश्ते 

               आजकल

 जुवान से निभाने का वक्त कहाँ है

          सब टच में बिजी है

        पर टच में कोई नहीं है   ।

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A carpenter went home  shutting down his workshop, a black poisonous cobra entered his workshop.
The cobra was hungry and hoped to find its supper lurking somewhere within. It slithered from one end to another and accidentally bumped into a double-edged metal axe and got very slightly injured.
In anger and seeking revenge, the snake bit the axe with full force. What could a bite do to a metallic axe? Instead the cobra’s mouth started bleeding.
Out of fury and arrogance, the cobra tried its best to strangle and kill the object that was causing it pain by wrapping itself very tightly around the blades.
The next day when the carpenter opened the workshop, he found a seriously cut, dead cobra wrapped around the axe blades.
The cobra died not because of someone else’s fault but faced these consequences merely because of its own anger and wrath.

· Sometimes when angry, we try to cause harm to others but as time passes by, we realise that we have caused more harm to ourselves.
· For a happy life, it’s best we should learn to ignore and overlook some things, people, incidents, affairs and matters.

· It is not necessary that we show a reaction to everything. Step back and ask yourself if the matter is really worth responding or reacting to.
Lets treat people with kindness even if they hurt you.
· People that show no inclination to change, are best handled with silence and prayer.
THIS  story can help us take good decisions.🤗🤗

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व्यंग

👴👴👴👴👴👴👴👴👱

         🤴🏻एक बार राजा के दरबार मै एक फ़कीर गाना गाने जाता है
          🗣फ़कीर बहुत अच्छा गाना गाता है।
           राजा कहते हैं इसे खूब सारा सोना✨✨✨ दे दो।
           🗣🗣फ़कीर और अच्छा गाता है।
           राजा कहते हैं इसे हीरे जवाहरात💎 भी दे दो।
          🗣🗣🗣फकीर और अच्छा गाता है। 
          राजा कहते हैं 

इसे असरफियाँ💰 भी दे दो। 
           🗣🗣🗣🗣फ़कीर और अच्छा गाता है। 
           राजा कहते हैं 

इसे खूब सारी ज़मीन🏜 भी दे दो। 
           फ़कीर गाना गा कर घर 🚶🏻चला जाता है। 
           और 

          🙃🙂अपने बीबी बच्चों से कहता है,,  
           आज  हमारे राजा जी ने गाने का खूब सारा इनाम🏆🏆🎖🎖🏵🏵 दिया। 
          💫✨⭐🌟हीरे,जवाहरात,सोना,ज़मीन, असरफियाँ बहुत कुछ दिया।
 

          👯‍♂🕺🏼👭सब बहुत खुश होते हैं 
          कुछ दिन बीते 
          😌फ़कीर को अभी तक मिलने वाला इनाम नही पहुँचा था…
          फ़कीरे दरवार में फिर पहुँचा…
कहने लगा….
        *”राजा जी आप के द्वारा दिया गया इनाम मुझे अभी तक नहीं मिला।”*¿¿¿¿
        🤴🏻राजा कहते हैं ..,,,
          🤞🏻अरे फ़कीर ये लेन देन की बात क्या करता है।
          *”तू मेरे कानों👂🏻को खुश करता रहा”…*
           और 
           🤗मैं तेरे कानों👂🏻 को खुश करता रहा।
😛😝😜😛😝😜😳😳😳
           😇फकीर बेहोश😴
         👊🏻राजा का असली नाम *नरेंद्र मोदी*  हैं और फ़कीर india की जनता।
       

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​”शुक्र है शिक्षक हूँ” 

“शुक्र है शिक्षक हूँ” 
नेता नहीं, एक्टर नहीं, रिश्वत खोर नहीं,

शुक्र है शिक्षक हूँ , कुछ और नही…
न मैं स्पाइसजेट में घूमने वाला गरीब हूँ, 

न मैं किसी पार्टी के करीब हूँ…
कभी राष्ट्रीयता की बहस में मैं पड़ती नहीं…

मैं जन धन का लूटेरा या टैक्स चोर नहीं,

शुक्र है शिक्षक हूँ कुछ और नहीं…
न मेरे पास मंच पर चिल्लाने का वक्त है ,

न मेरा कोई दोस्त अफज़ल , याकूब का भक्त है…

न मुझे देश में देश से आज़ादी का अरमान है,

न मुझे 2 – 4 पोथे पढ़ लेने का गुमान है..
मेरी मौत पर गन्दी राजनीति नहीं, कोई शोर नही,

शुक्र है शिक्षक हूँ, कुछ और नही …
मेरे पास मैडल नही वापस लौटाने को,

नक़ली आँसू भी नही बेवजह बहाने को…

न झूठे वादे हैं, न वादा खिलाफी है,

कुछ देर चैन से सो लूँ इतना ही काफी है…
बेशक खामोश हूँ, मगर कमज़ोर नही,

शुक्र है शिक्षक हूँ कुछ और नही..
मैं और सड़क एक जैसे कहलाते हैं

क्योंकि हम दोनों वहीं रहते है

लेकिन सबको मंजिल तक पहुँचाते हैं,

रोज़ वही कक्षा, वही बच्चे, पर होती मैं कभी बोर नहीं,

शुक्र है शिक्षक हूँ … कुछ और नहीं.

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​”अमृता प्रीतम” की एक कविता

वह कहता था, 

वह सुनती थी,

जारी था एक खेल

कहने-सुनने का।
खेल में थी दो पर्चियाँ।

एक में लिखा था *‘कहो’*,

एक में लिखा था *‘सुनो’*।
अब यह नियति थी 

या महज़ संयोग?

उसके हाथ लगती रही वही पर्ची

जिस पर लिखा था *‘सुनो’*।
वह सुनती रही।

उसने सुने आदेश।

उसने सुने उपदेश।

बन्दिशें उसके लिए थीं।

उसके लिए थीं वर्जनाएँ।
वह जानती थी,

‘कहना-सुनना’

नहीं हैं केवल क्रियाएं।
राजा ने कहा, ‘ज़हर पियो’

*वह मीरा हो गई।*
ऋषि ने कहा, ‘पत्थर बनो’

*वह अहिल्या हो गई।*
प्रभु ने कहा, ‘निकल जाओ’

*वह सीता हो गई।*
चिता से निकली चीख,

किन्हीं कानों ने नहीं सुनी।

*वह सती हो गई।*
तीन बार तलाक कहा तो परित्यक्ता हो गयी           
घुटती रही उसकी फरियाद,

अटके रहे शब्द,

सिले रहे होंठ,

रुन्धा रहा गला।
उसके हाथ *कभी नहीं लगी वह पर्ची,*

जिस पर लिखा था, *‘कहो’*।
-Amrita Pritam

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आत्मचिंतन

हाल ही मे तीन बुरी खबरों ने देश को हिला दिया……
1. 12000 करोड़ की रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।
2. अरबपति महिला मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोडो के फ्लैट में पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी…विदेश में बहुत बड़ी नौकरी करने करोड़पति बेटे को पता ही नहीं माँ कब मर गयी।
3. सपने सच कर आई ए एस का पद पाये बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।
…… ये तीन घटनाये बताती है जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा ये सब कुछ काम का नहीं…. यदि आपके जीवन में ख़ुशी संतुष्टी और अपने नहीं है तो कुछ भी मायने नही रखता ….
वरना एक क्लेक्टर को क्या जरुरत थी जो उसे आत्महत्या करना पड़ा।
..खुशियाँ पैसो से नहीं मिलती.. अपनों से मिलती है।
पैसा बहुत कुछ है, लेकिन सब कुछ नही है।
जीवनन आनंद के लिए है, चाहे जो हो, बस मुस्कुराते रहो !!​
यदि आप चिंतित हो, तो खुद को थोड़ा आराम दो,
कुछ आइसक्रीम, चॉकलेट, केक लो…
अंग्रेजी वर्ण हमें सिखाते हैं…

 

A B C….

​Avoid Boring Company​

​मायूस संगत से दूरी​
D E F…

​Don’t Entertain Fools​

​मूर्खों पर समय व्यर्थ मत करो​
G H I….

​Go For High Ideas​

​ऊंचे विचार रखो​
J K L M….

​Just Keep a friend like Me​

​मेरे जैसा मित्र रखो​
N O P…

​Never Overlook the Poor n Suffering​

​गरीब व पीडित को कभी अनदेखा मत करो​
Q R S..

​Quit Reacting to Silly tales​

​मूर्खों को प्रतिक्रिया मत दो​
T U V….

​Tune Urself for ur Victory​

​खुद की जीत सुनिश्चित करो​
W X Y Z….

​We Xpect You to Zoom ahead in life​

​हम आपसे जीवन मे आगे देखने की आशा करते हैं !!​
यदि आपने चाँद को देखा, तो आपने ईश्वर की सुन्दरता देखी… 
यदि आपने सूर्य को देखा, तो आपने ईश्वर का बल देखा…
​और यदि आपने आइना देखा तो आपने ईश्वर की सबसे सुंदर रचना देखी।​
​इसलिए स्वयं पर विश्वास रखो !!​
जीवन में हमारा उद्देश्य होना चाहिए…

​9 8 7 6 5 4 3 2 1 0​
9 – गिलास पानी,

8- घंटे नींद,

7- यात्रायें परिवार के साथ,

6- अंकों की आय,

5- दिन हफ्ते में काम,

4- चक्का वाहन,

3- बेडरूम वाला फ्लेट,

2- अच्छे बच्चे,

1- जीवनसाथी,

0- चिंता..!!

अपूर्व सीतापुरी।।

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जब एक लड़की ससुराल जाती हैं

बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है..

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☺एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है..

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😔अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है..

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☺अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है..

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☺सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..

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😊नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है..

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☺पति को विदा कर बच्चों का टिफिन सजाती है..

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😔झाडू पोछा निपटा कर कपड़ों पर जुट जाती है..

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😔पता ही नही चलता कब सुबह से दोपहर हो जाती है..

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☺फिर से सबका खाना बनाने किचन में जुट जाती है.. 

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☺सास ससुर को खाना परोस स्कूल से बच्चों को लाती है..

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😊बच्चों संग हंसते हंसते खाना खाती और खिलाती है..

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☺फिर बच्चों को टयूशन छोड़,थैला थाम बाजार जाती है..

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☺घर के अनगिनत काम कुछ देर में निपटाकर आती है..

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😔पता ही नही चलता कब दोपहर से शाम हो जाती है..

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😔सास ससुर की चाय बनाकर फिर से चौके में जुट जाती है..

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☺खाना पीना निपटाकर फिर बर्तनों पर जुट जाती है..

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😔सबको सुलाकर सुबह उठने को फिर से वो सो जाती है..

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😏हैरान हूं दोस्तों ये देखकर सौलह घंटे ड्यूटी बजाती है..

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😳फिर भी एक पैसे की पगार नही पाती है..

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😳ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत का मजाक उडाती है..

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😳ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत पर चुटकुले बनाती है..

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😏जो पत्नी मां बहन बेटी ना जाने कितने रिश्ते निभाती है..

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😔सबके आंसू पोंछती है लेकिन खुद के आंसू छुपाती है..

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🙏नमन है मेरा घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..☺

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☺ड़ोली में बैठकर आती है और अर्थी पर लेटकर जाती

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अशोक चक्रधर की हास्यकविता

परेशान पति ने पत्नी से कहा –

एक मैं हूं जो तुम्हें निभा रहा हूँ

लेकिन अब,

पानी सर से ऊपर जा चुका है

इस लिये आत्म-हत्या करने जा रहा हूँ

पत्नी बोली – ठीक है,

लेकिन हमेशा की तरह

आज मत भूल जाना,

और लौटते समय

दो किलो आटा जरूर लेते आना

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शादियों का साइड इफेक्ट: हास्य कविता

मेरा हास्य कवि बनना एक हादसा था

बस में एक मैडम जी से पड़ गया वास्ता था

बात उन दिनों कि है जब मैं कवांरा

लोगों की नजर में मैं एक आवांरा था….

लेकिन मुझे तो लैला मजनू के प्यार की खोज थी

गलि से लेकर बस स्टैंड में रोज थी

ऐसे में एक दिन एक मैंडम जी मुझसे बस में टकरायीं

मेरे रोम- रोम में करेंट समायी…

और मन में विचार कौंधा कि

मेरा थोबड़ा उन्हें भा गया है क्या भाई

फिर मैंने उनपर थोड़ी सी और नजर गड़ायी

अबकी बार वे थोड़ी सी षरमायी…

लड़की हंसी तो पटीवाली बात मुझे याद आयी

फिर मोबाइल पर वे कुछ अंग्रेजी में गिटपिटाईं

जो बात मेरे भेजे में नहीं समायी

फिर मुसटंडो की जमात आयी…

जी भर के उन सबों ने मेरी की पिटायी

और मुंह पर कालीख पोतकर

गदहा पर मेरी बारात निकलवायी

और गदहे को गदहा पर देखकर…

गदहों ने जी भर कर ताली बजायी

इस प्रकार मैं हास्य कवि बन गया मेरे भाई।

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डॉ. विश्वास

“लोग कहते हैं रूह बिकती है
मैं जहाँ हूँ उधर नहीं मिलती”

“उसने सौपा नहीं मुझको मेरे हिस्से का वज़ूद
उसकी कोशिश है कि मुझसे मेरी रंजिश भी रहे”

“उस सभा में सभ्यता के नाम पर जो मौन था
बस उसी के कथ्य में मौज़ूद तल की बात थी।”

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